अगर शायरी ना होती तो
अगर शायरी ना होती तो
दर्द ए दिल बया ना होता
हुस्न ए तारीफ़ लब्जों मे ना होती
जिने का बहाना ना होता
प्यार का इज़हार कैसे होता
दर्द बॉंटने का सुकून ना मिलता
महफ़िल के रंग ना जमते
दर्द ए यार दिल छू न जाता
जाम का नशा ना होता
आवाज़ मे दर्द का एहसास ना होता
आपके शायराने अंदाज से हम बेख़बर रहते
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